MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 70%-80%-90% प्रोबेशन वेतन व्यवस्था निरस्त, 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त संबंधित कर्मचारियों को मिलेगा पूर्ण वेतन
MP में 70%-80%-90% प्रोबेशन वेतन व्यवस्था निरस्त
हाईकोर्ट की डबल बेंच का बड़ा फैसला — 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त संबंधित कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि के कार्य का पूर्ण वेतन देने का आदेश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर की डबल बेंच ने 08 सितंबर 2026 को दिए गए एक महत्वपूर्ण संयुक्त आदेश में प्रोबेशन अवधि के दौरान न्यूनतम वेतनमान के 70%, 80% और 90% भुगतान से संबंधित प्रावधानों को निरस्त कर दिया है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त संबंधित शासकीय कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में किए गए कार्य के लिए पूर्ण वेतन का भुगतान किया जाए।
वेतन व्यवस्था निरस्त
वेतन व्यवस्था निरस्त
वेतन व्यवस्था निरस्त
पूर्ण वेतन
न्यायालय: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
पीठ: माननीय न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं माननीय न्यायमूर्ति श्री प्रदीप मित्तल
निर्णय सुनाया गया: 08 सितंबर 2026
Neutral Citation: 2026:MPHC-JBP:66385
मुख्य याचिका: WP No.14411/2020
अन्य प्रमुख याचिका: WP No.50654/2025 एवं अन्य संबद्ध रिट याचिकाएं
कोर्ट ने समान मुद्दे वाली कई रिट याचिकाओं का निपटारा एक संयुक्त आदेश के माध्यम से किया।
| क्रमांक | रिट याचिका | याचिकाकर्ता |
|---|---|---|
| 1 | WP 14411/2020 | राहुल सिंह कछवाह एवं अन्य |
| 2 | WP 25316/2025 | शरद कुमार एवं अन्य |
| 3 | WP 50654/2025 | आनंद कुमार मिश्रा एवं अन्य |
| 4 | WP 1470/2026 | रामनरेश गायधने एवं अन्य |
| 5 | WP 1897/2026 | विल्सन साईं रहांगडाले एवं अन्य |
| 6 | WP 2848/2026 | मनीषा अहिरवार |
| 7 | WP 2862/2026 | भूपेन्द्र पवार एवं अन्य |
| 8 | WP 3326/2026 | चेतन पाठक एवं अन्य |
| 9 | WP 3359/2026 | मनीष इनवाती एवं अन्य |
| 10 | WP 3761/2026 | जितेंद्र एवं अन्य |
| 11 | WP 4772/2026 | हेमंत हेलोन्डे एवं अन्य |
| 12 | WP 24056/2026 | ज्योति नेमा एवं अन्य |
मध्यप्रदेश सरकार के 25 नवंबर 2019 के मंत्रिपरिषद निर्णय तथा उसके बाद जारी नियम/परिपत्रों के आधार पर कुछ सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों को तीन वर्ष की प्रोबेशन अवधि के दौरान न्यूनतम वेतनमान के अलग-अलग प्रतिशत के अनुसार भुगतान किया जाता था।
| प्रोबेशन वर्ष | पहले लागू भुगतान | हाईकोर्ट के नए आदेश के बाद |
|---|---|---|
| प्रथम वर्ष | 70% | पूर्ण वेतन |
| द्वितीय वर्ष | 80% | पूर्ण वेतन |
| तृतीय वर्ष | 90% | पूर्ण वेतन |
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विधिवत चयन प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त कर्मचारी से पद के अनुरूप कार्य लिया जाता है और वह प्रोबेशन अवधि में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है।
ऐसी स्थिति में केवल प्रोबेशन के आधार पर निर्धारित वेतनमान से कम भुगतान करने का पर्याप्त तार्किक आधार नहीं पाया गया।
कोर्ट ने यह भी माना कि यदि कर्मचारी से 100% कार्य लिया जा रहा है तो उसे 100% वेतन से वंचित करने का औचित्य नहीं है।
70%, 80% और 90% की स्लैब व्यवस्था तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण है, जबकि प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों पर इसी प्रकार की व्यवस्था लागू नहीं थी।
कोर्ट ने इस व्यवस्था को संविधान के अनुच्छेद 12 और 14 के विपरीत माना।
- GAD का 12 दिसंबर 2019 का 70%-80%-90% स्टाइपेंड संबंधी परिपत्र।
- 25 नवंबर 2019 के मंत्रिपरिषद निर्णय के आधार पर बनाए गए संबंधित प्रावधान।
- मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के संबंधित प्रावधान।
- मूल नियमों में किए गए संबंधित संशोधन, जिनमें प्रोबेशन के दौरान 70%, 80% और 90% भुगतान की व्यवस्था की गई थी।
- स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग के भर्ती नियमों में इस व्यवस्था से संबंधित किए गए संशोधन।
इस संयुक्त आदेश में मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक संवर्ग), सेवा शर्तें एवं भर्ती नियम, 2018 तथा मध्यप्रदेश जनजातीय एवं अनुसूचित जाति शिक्षण संवर्ग से जुड़े नियमों को भी चुनौती दी गई थी।
इसलिए नए भर्ती नियमों के अंतर्गत नियुक्त ऐसे शिक्षक जिन पर प्रोबेशन अवधि में 70%-80%-90% भुगतान संबंधी व्यवस्था लागू की गई थी, उनके लिए यह फैसला अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कोर्ट के आदेश के अनुसार:
इसमें वे कर्मचारी शामिल हो सकते हैं जिनकी नियुक्ति संबंधित विभागों/भर्ती नियमों के अंतर्गत हुई और जिन पर 70%-80%-90% स्टाइपेंड व्यवस्था लागू की गई थी।
सटीक लाभ कर्मचारी की नियुक्ति, विभाग, पद, लागू भर्ती नियम और वेतन भुगतान के रिकॉर्ड के अनुसार निर्धारित होगा।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि संबंधित कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि के दौरान किए गए कार्य के लिए पूर्ण वेतन का भुगतान किया जाए।
इसका अर्थ है कि जिन पात्र कर्मचारियों को पहले 70%, 80% या 90% के आधार पर भुगतान मिला था, उनके मामले में पूर्ण वेतन और पहले किए गए भुगतान के बीच का अंतर महत्वपूर्ण होगा।
इस विषय से जुड़े पहले के हाईकोर्ट आदेशों में 70%-80%-90% व्यवस्था के आधार पर की गई वेतन रिकवरी को भी चुनौती दी गई थी।
08 सितंबर 2026 के संयुक्त आदेश में पुराने न्यायिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि ऐसी वेतन कटौती/रिकवरी की व्यवस्था का आधार ही न्यायालय द्वारा असंगत माना गया है।
अतः संबंधित कर्मचारियों को अपने वेतन रिकॉर्ड और विभाग द्वारा की गई किसी भी रिकवरी की जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए।
| केस | तारीख | महत्व |
|---|---|---|
|
State of MP vs Dilliraj Bhilala
WA No.1498/2024 |
28 अप्रैल 2025 | 70%-80%-90% व्यवस्था पर महत्वपूर्ण निर्णय। |
|
Indore Municipal Corporation vs Vinita Tiwari
WA No.2977/2025 |
31 अक्टूबर 2025 | पूर्व निर्णय के सिद्धांत को दोहराया गया। |
| WP No.12125/2021 एवं संबद्ध मामले | 06 जनवरी 2026 | 70%-80%-90% के आधार पर वेतन रिकवरी से संबंधित राहत। |
WP No.50654/2025 – Final Order
आदेश दिनांक: 08-09-2026
Neutral Citation: 2026:MPHC-JBP:66385
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1. 70%, 80% और 90% स्टाइपेंड से संबंधित सभी चुनौती दिए गए नियम/परिपत्र निरस्त किए जाते हैं।
2. संबंधित विभागों द्वारा इस व्यवस्था के आधार पर किए गए संबंधित संशोधन भी निरस्त किए जाते हैं।
3. 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त संबंधित शासकीय कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में किए गए कार्य के लिए पूर्ण वेतन का भुगतान किया जाए।
4. सभी संबंधित रिट याचिकाएं स्वीकार की जाती हैं।
हाँ। इस संयुक्त आदेश में प्रोबेशन के दौरान 70%, 80% और 90% भुगतान का प्रावधान करने वाले संबंधित नियम/परिपत्र निरस्त किए गए हैं।
आदेश के अनुसार संबंधित शासकीय कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में किए गए कार्य के लिए पूर्ण वेतन का भुगतान किया जाना है।
जिन संबंधित शिक्षक संवर्गों पर चुनौती दिए गए नियम/70%-80%-90% भुगतान व्यवस्था लागू थी, उनके लिए यह आदेश महत्वपूर्ण है। व्यक्तिगत लाभ नियुक्ति एवं लागू नियमों के अनुसार निर्धारित होगा।
आदेश में संबंधित कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में किए गए कार्य के लिए पूर्ण वेतन देने का निर्देश है। इसलिए पहले मिले 70%, 80% या 90% भुगतान और देय पूर्ण वेतन के बीच का अंतर संबंधित पात्र मामलों में महत्वपूर्ण होगा।
कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई करनी होगी। भुगतान की वास्तविक प्रक्रिया और समय विभागीय अनुपालन आदेशों पर निर्भर करेगा।
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अस्वीकरण: यह पोस्ट न्यायालय के उपलब्ध आदेश एवं सार्वजनिक न्यायिक जानकारी के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत वेतन पात्रता, एरियर, रिकवरी अथवा विभागीय कार्रवाई के संबंध में अंतिम स्थिति उसके नियुक्ति आदेश, लागू भर्ती नियम, सेवा रिकॉर्ड तथा विभागीय अनुपालन आदेश के आधार पर निर्धारित होगी। किसी व्यक्तिगत मामले में आवश्यक होने पर विधिक विशेषज्ञ से सलाह लें।
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